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Jan 31, 2018, 15:50 IST

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ओशो के इन सुविचारों को जीवन में उतारने का प्रयास करें

ओशो किसी परचय मोहताज नहीं है। एक भारतीय संत ने अपने जमाने में इस कदर लोगों कद्र लोगों पर प्रभाव डला कि पश्चिमी दुनिया की कई राजनैतिक शक्तियां इनके खिलाफ हो गई। किसी के लिए ओशो महान वक्ता, संत और आध्यात्मिक गुरु थे लेकिन कई लोग ओशो को केवल सनकी और सेक्स गुरु के तौर पर देखते थे। इन सबके बावजूद ओशो के विश्व भर में आज भी सैकेडों प्रशंसक और अनुयायी हैं।


रजनीश, आचार्य रजनीश या ओशो आप इन्हें किसी भी नाम से पुकार सकते हैं। ओशो की धारणा समय से आगे की थी और इस वजह से उन्हें उस दौर में काफी विरोध झेलना पड़ा। जिस खुलेपन का उन्होंने समर्थन किया वह मनुष्य को संतुष्टि तक ले जाता था लेकिन लोगों की नजर में यह केवल वासना को बढ़ाने का एक जरिया लगा।


ओशो का कद

ओशो ने विश्व को धर्म, समाज और दर्शन को देखने और समझने का एक नया तरीका दिया। महाराष्ट्र के पूना में उन्होंने अपना आश्रम बनाया जो उस समय काफी प्रसिद्ध हुआ।



लाखों सैलानी यहां हर वर्ष आने लगे और फिर उन्होंने रुख किया अमेरिका का। अमेरिका में उन्होंने “रजनीशपुरम” की स्थापना की। कहा जाता है कि उस समय की अमेरिकी सरकार रजनीश ओशो के कद से इतनी घबरा गई थी कि उन्हें मारने की साजिश भी रचने लगी।


ओशो की विचारधारा

ओशो का कहना था कि जिस तरह भोजन खाने के बाद भूख मिट जाती है उसी प्रकार वासना की पूर्ति होने पर मनुष्य शांत हो जाता है और एक संतुष्ट मन किसी भी कार्य को आसानी से सिद्ध कर सकता है। कई लोग इसे ही उनकी रचना संभोग से साधना तक का सार मानते हैं।


समाजवाद, राजनीति, संस्थागत धर्म प्रणाली आदि पर उनके प्रवचन आज काफी विचारणीय हैं। ओशो ने अपने जीवन में कई ऐसी बाते भी बताई जिनका अनुसरण कर हम अपना जीवन आदर्श बना सकते हैं। सेक्स, खुलापन, नग्नता आदि तो उनके केवल कुछ सिद्धांत थे। आइये एक नजर डालें ऐसे कथनों पर जिन्हें पढ़ने के बाद शायद आपके मन से ओशो के प्रति सेक्स गुरु की धारणा टूट जाए।


ओशो के सुविचार

अगर आप सच देखना चाहते हैं तो सहमति या असहमति पर राय ना बनाएं।


जब प्यार और नफरत दोनों ही ना हो तो हर चीज साफ़ और स्पष्ट हो जाती है।


मूर्ख दूसरों पर हँसते हैं। बुद्धिमान खुद पर।


उस राह पर मत चलिए जिस पर आपको डर लेकर जाए। उस राह पर चलिए जिस तरह प्रेम आपको चलाये, उस राह पर चलिए जिस तरह ख़ुशी आपको चलाये।


आप जितने चाहे उतने लोगों को प्रेम कर सकते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि आप दिवालिया हो जाएंगे। प्रेम करने से कम नहीं होता है।


मित्रता सबसे शुद्ध प्रेम है, यह प्रेम का सर्वोच्च रूप है। यहां कुछ भी कभी भी मांगा जा सकता है। यहां कोई शर्त नहीं है। यहां आनंद बस देने में होता है।


कल कभी नहीं होता, जब भी हाथ में आता है तो वह है आज और हम उसको भी कल पर छोड़ देते हैं। इस तरह हम जीते ही नहीं है और स्थगित किए चले जाते हैं कि कल जी लेंगे परसों जी लेंगे।


जो भी किया जा सकता है उसे आज ही पूरा कर दें क्योंकि जिस काम को आप कल के लिए छोड़ते हैं उसे करने में आपका संकल्प ही नहीं होता है।


जीवन ठहराव और गति के बीच का एक संतुलन है।


आपको किसी से भी स्पर्धा करने की आवश्यकता नहीं है। आप जैसे हैं अच्छे हैं।


सवाल यह नहीं है कि कितना सीखा जा सकता है बल्कि सवाल यह है कि कितना भूला जा सकता है।


आप जो सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं।


यह मत सोचो कि कौन तुम्हारा सच्चा मित्र है बल्कि यह सोचो कि तु किसके सच्चे मित्र हो।


अधिक से अधिक भोले, बच्चे की तरह बनिए। जीवन को मजे के रूप में लीजिए, क्योंकि वास्तविकता में यही जीवन है।


जब प्यार और नफरत दोनों ही ना हो तो हर चीज साफ़ और स्पष्ट हो जाती है।


जिंदगी में जो करना है कर लीजिए, यह मत सोचिए कि लोग क्या कहेंगे? क्योंकि लोग तो तब भी कहेंगे जब आप कुछ नहीं करेंगे।


सारी शिक्षा, कला सब बेकार है अगर यह तुम्हें यह नहीं सिखाती कि खुद में कैसे डूबना है?


ठोकर खा कर भी ना संभलना रो मुसाफिर का नसीब है वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज अदा कर दिया है।


कोई आदमी चाहे लाखों चीजें जान ले। चाहे वह पूरे जगत को जान ले। लेकिन अगर वह स्वयं को नहीं जानता है तो वह अज्ञानी है।


भूल भी ठीक की तरफ ले जाने का मार्ग है। इसलिए भूल करने से डरना नहीं चाहिये, नहीं तो कोई आदमी ठीक तक कभी पहुँचता ही नहीं। भूल करने से जो डरता है वह भूल मे ही रह जाता है। खूब दिल खोल कर भूल करनी चाहिये। एक ही बात ध्‍यान रखनी चहिये की एक भूल दुबारा फिर ना हो।


इंसान रोबोट की तरह रहता है, मैकेनिक्ली इफिसियेंट, पर बिना चेतना के।


लोग आजादी को पसंद करते है, लेकिन कोई जिम्‍मेदारी नहीं चाहता। यह दोनों एकसाथ आते हैं, इन्‍हें अलग नहीं किया जा सकता है।

तो यह थे कुछ ऐसे विचार जिनका अनुसरन कर आप अपने जीवन के कई प्रश्नों का उत्तर पा सकते हैं। ओशो के विषय में किसी भी परिणाम तक पहुंचने से पहले जरूरी है कि हम उनके सभी विचारों को जान लें। आशा है उपरोक्त कथनों के बाद ओशो के लिए आपके मन में एक नया विचार जन्म लिया हो।



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